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Roop chaudas narak chaturdashi

रूप चौदस या नरक चतुर्दशी

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ROOP CHAUDAS YA NARAK CHAUTARDASHI : रूप चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है, लेकिन कुछ वर्षों में यह दीपावली के दिन ही पड़ सकता है। इस दिन सौंदर्य की देखभाल के लिए उबटन लगाने की परंपरा है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है। इस दिन मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है।

इस पर्व को नरक चतुर्दशी कहने के पीछे एक पौराणिक कथा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने सोलह हजार एक सौ कन्याओं को बंदी बना रखा था, जिन्हें श्रीकृष्ण ने मुक्त कराया और उन्हें सम्मान दिलाया। इस विजय के उपलक्ष्य में यह दिन मनाया जाता है। नरकासुर के वध से लोगों को भय से मुक्ति मिली और उन्हें एक नया जीवन मिला, जिसके बाद से खुद को संवारने की परंपरा शुरू हुई।

रूप चतुर्दशी के दिन यमराज की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर यम के नाम का दीपक जलाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन अभ्यंग स्नान यानी तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश और उबटन लगाकर स्नान करने का भी विधान है। यह स्नान चंद्रमा की उपस्थिति में, लेकिन सूर्योदय से पहले किया जाता है।

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About the author

Bharti Sharma

मैं हूं भारती शर्मा और इस ऐप पर मैं आपको सुनाती हूं सरकारी योजनाओं की कहानियां। कहानिया। जो सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन में आए बदलाव, संघर्ष और मेहनत की मिसाल हैं। हर योजना में छुपा है एक सबक… जो हमें जागरूक बनाता है, आगे बढ़ने की राह दिखाता है और जीवन को नए नजरिए से जीने की प्रेरणा देता है।

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