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राणा कुंभा

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Rana Kumbha Biography: महाराणा कुंभा, जिन्हें कुंभकर्ण सिंह के नाम से भी जाना जाता है, मध्यकालीन भारत में मेवाड़ राज्य के एक शक्तिशाली शासक थे। उनका जन्म 1417 ईस्वी में हुआ था और उन्होंने 1433 ईस्वी से 1468 ईस्वी तक शासन किया। उनके शासनकाल में मेवाड़ उत्तरी भारत की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक शक्तियों में से एक बन गया। राणा कुंभा सिसोदिया वंश के थे और अपने पिता राणा मोकल सिंह के उत्तराधिकारी बने। उनकी दादी हंसा बाई ने उनके प्रारंभिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके शासनकाल के दौरान भी उनका काफी प्रभाव रहा ।

राणा कुंभा ने अपने जीवनकाल में 56 युद्ध लड़े और कहा जाता है कि उन्होंने कोई भी युद्ध नहीं हारा। उन्होंने जांगलदेश, मारवाड़, सारंगपुर, रणथंभौर, आबू और नागौर सहित कई क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की। उन्होंने मालवा और गुजरात के सुल्तानों को भी कई बार पराजित किया। मेवाड़ की रक्षा के लिए 84 किलों में से 32 का निर्माण राणा कुंभा ने करवाया था। इनमें कुंभलगढ़ का किला प्रमुख है, जो राजस्थान का सबसे ऊंचा किला है। उन्होंने 1448 ईस्वी में मालवा और गुजरात की संयुक्त सेनाओं पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में चित्तौड़ में 37 मीटर ऊंचा विजय स्तंभ बनवाया था ।

राणा कुंभा कला और संगीत के संरक्षक भी थे। वे स्वयं वीणा बजाने में निपुण थे और उन्होंने अपने दरबार में संगीतकारों और कलाकारों को संरक्षण दिया। उन्होंने जयदेव के गीत गोविंद पर एक टीका और चंडीशतकम पर एक व्याख्या लिखी। उन्होंने संगीत पर ग्रंथ भी लिखे, जिनमें ‘संगीत राज’ और ‘संगीत मीमांसा’ प्रमुख हैं। वे संस्कृत, प्राकृत और स्थानीय राजस्थानी बोलियों में चार नाटकों के लेखक भी थे। 1468 ईस्वी में उनके पुत्र उदयसिंह प्रथम ने उनकी हत्या कर दी थी ।

राणा कुंभा का शासनकाल मेवाड़ के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय माना जाता है। उनकी सैन्य विजय, स्थापत्य कला में योगदान और कला तथा संस्कृति के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें एक महान शासक के रूप में स्थापित किया।

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Rupali Kumawat

मैं हूँ रुपाली कुमावत और Community Voice पर लेकर आई हूँ श्रृंखला “भारत के प्रेरक चेहरे” यहाँ मैं आपको सुनाती हूँ उन महान व्यक्तित्वों की कहानियाँ जिन्होंने अपने विचार संघर्ष और कर्म से भारत की दिशा तय की। चाहे वे हों प्रधानमंत्री राष्ट्रपति उद्योगपति स्वतंत्रता सेनानी या ऐतिहासिक वीर। हर कहानी में छुपा है साहस समर्पण और प्रेरणा का एक नया अध्याय।सुनिए वे कहानियाँ जो केवल इतिहास नहीं बल्कि जीवन को देखने का एक नया नजरिया देती हैं।

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