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धनतेरस

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DHANTERAS: धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दिवाली के त्योहार का पहला दिन है। यह अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जिन्हें आयुर्वेद का देवता माना जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 2016 से धनतेरस को ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है ।

धनतेरस के दिन लोग नए बर्तन, सोना और चांदी खरीदना शुभ मानते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदारी करने से घर में धन और समृद्धि आती है। इस दिन घरों की साफ-सफाई की जाती है और उन्हें रंगोली व दीयों से सजाया जाता है। शाम को देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और उनके स्वागत के लिए घर के मुख्य द्वार पर छोटे-छोटे पदचिह्न बनाए जाते हैं। महाराष्ट्र में सूखे धनिये के बीज को गुड़ के साथ मिलाकर नैवेद्य के रूप में चढ़ाने की परंपरा है ।

धनतेरस की रात यमदीपदान का भी महत्व है। इस दिन यमराज को प्रसन्न करने के लिए घर के बाहर दीपक जलाए जाते हैं, ताकि परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु से बचाया जा सके। एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिमा के 16 वर्षीय पुत्र को सांप के काटने से मृत्यु का श्राप मिला था। उसकी पत्नी ने अपनी चतुराई से यमराज को भ्रमित कर अपने पति के प्राण बचाए थे। इसी कारण इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है । जैन धर्म में इस दिन को धन्यतेरस के रूप में मनाया जाता है, जिसका अर्थ है ‘तेरहवाँ शुभ दिन’ ।

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Bharti Sharma

मैं हूं भारती शर्मा और इस ऐप पर मैं आपको सुनाती हूं सरकारी योजनाओं की कहानियां। कहानिया। जो सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन में आए बदलाव, संघर्ष और मेहनत की मिसाल हैं। हर योजना में छुपा है एक सबक… जो हमें जागरूक बनाता है, आगे बढ़ने की राह दिखाता है और जीवन को नए नजरिए से जीने की प्रेरणा देता है।

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