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Shattila ekadashi

षट्तिला एकादशी

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Shattila Ekadashi: षट्तिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस एकादशी का नाम ‘तिल’ शब्द से आया है, क्योंकि इस दिन तिल का उपयोग छह अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। इन छह उपयोगों में स्नान, दान, भोजन, हवन, तिल का उबटन लगाना और तिल मिश्रित जल पीना शामिल है। यह दिन दान, शुद्धिकरण और भक्ति पर विशेष जोर देता है, जिसमें तिल के दान और दूसरों की सेवा के कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है ।

षट्तिला एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं। इस दिन अनाज, विशेषकर चावल का सेवन नहीं किया जाता है। यदि आवश्यक हो तो सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है। भक्त भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं, तुलसी और अन्य सामग्री चढ़ाते हैं। ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ जैसे मंत्रों का जाप किया जाता है। इस दिन तिल का दान करना, सात्विक भोजन, गर्म कपड़े या कंबल दान करना पारंपरिक माना जाता है ।

षट्तिला एकादशी का महत्व केवल उपवास तक ही सीमित नहीं है। भक्तों का मानना है कि यह व्रत पिछले पापों और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में मदद करता है। इस दिन किए गए दान और अच्छे कर्म शांति और समृद्धि लाते हैं। यह एकादशी आध्यात्मिक विकास और शुद्धिकरण के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। यह दिन दान, शुद्धिकरण और भक्ति पर विशेष जोर देता है, जिसमें तिल के दान और दूसरों की सेवा के कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है ।

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About the author

Bharti Sharma

मैं हूं भारती शर्मा और इस ऐप पर मैं आपको सुनाती हूं सरकारी योजनाओं की कहानियां। कहानिया। जो सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन में आए बदलाव, संघर्ष और मेहनत की मिसाल हैं। हर योजना में छुपा है एक सबक… जो हमें जागरूक बनाता है, आगे बढ़ने की राह दिखाता है और जीवन को नए नजरिए से जीने की प्रेरणा देता है।

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