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आंवला नवमी

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AAVLA NAVMI: आंवला नवमी, जिसे अक्षय नवमी भी कहते हैं, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन आंवले के पेड़ की पूजा के लिए समर्पित है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि माना जाता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु और शिव निवास करते हैं। इस दिन भक्त सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं।

आंवला नवमी पर पूजा के कई विधान हैं। भक्त सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करते हैं। इसके बाद वे आंवले के पेड़ को जल, पीले फूल, हल्दी, रोली, अक्षत और मिठाई चढ़ाते हैं। पेड़ के चारों ओर सात बार परिक्रमा की जाती है और एक पवित्र लाल धागा (मौली) बांधा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित वैदिक मंत्रों का जाप करते हुए देसी घी का दीपक जलाया जाता है। इस दिन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इस दिन दान-पुण्य का भी बहुत महत्व है। गरीबों, गायों और पक्षियों को भोजन कराना शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और उन्हें वस्त्र व दक्षिणा देते हैं। पश्चिम बंगाल में इस दिन जगद्धात्री पूजा भी की जाती है। आंवला नवमी प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरणीय जागरूकता और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है। इस दिन आंवले का सेवन करना शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों तरह से लाभकारी माना जाता है।

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About the author

Bharti Sharma

मैं हूं भारती शर्मा और इस ऐप पर मैं आपको सुनाती हूं सरकारी योजनाओं की कहानियां। कहानिया। जो सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन में आए बदलाव, संघर्ष और मेहनत की मिसाल हैं। हर योजना में छुपा है एक सबक… जो हमें जागरूक बनाता है, आगे बढ़ने की राह दिखाता है और जीवन को नए नजरिए से जीने की प्रेरणा देता है।

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